World heart day : जरूरत है अपने दिल से प्यार करने की : योग गुरु पंकज शर्मा

World heart day : जरूरत है अपने दिल से प्यार करने की : योग गुरु पंकज शर्मा

योग गुरु पंकज शर्मा। भारत में ख़राब जीवन शैली, तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान की वजह से लोगों को दिल से संबंधित गंभीर रोग होने लगे हैं। हृदय रोग, दुनिया में मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख कारण है, और ह्रदय रोगों से होने वाली मौत किसी और रोग की तुलना में अधिक हैं.अव्यवस्थित जीवन शैली और असंतुलित खानपान के चलते दुनियाभर में हृदय रोग के पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोगों को अपनी सेहत की ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिलता, जिसका उन्हें भारी खामियाजा चुकाना पड़ता है। दिल की हिफाजत की जरूरत तो हर कोई समझता है, लेकिन इसके लिए प्रयास करने वाले लोग कम ही हैं. यही वजह है कि एक समय वृद्धावस्था में घेरने वाली दिल की बीमारी आज छोटी उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति तनाव से घिरा हुआ है, जो हृदयाघात को मुख्य कारण है. इसके अलावा अधिक मीठा या मसालेदार भोजन, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों का अभाव दिल को कमज़ोर बना रहे हैं और प्रदूषण भी इसमें अपना योगदान दे रहा है। लोग कई बार दिल की बीमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी न होने पर इसके लक्षणों की अनदेखी कर देते हैं और जानलेवा स्थिति तक पहुंच जाते हैं.धमनियों में रूकावट होने पर सीने में दबाव और दर्द के साथ खिंचाव महसूस होता है । कई बार मितली, सीने में जलन, पेट में दर्द या फिर पाचन संबंधी दिक्कतें भी आने लगती हैं. बाएं कंधे में दर्द भी दिल की बीमारी की दस्तक हो सकती है. पैरों में दर्द, सूजन पसीना आना और घबराहट होना भी खतरे की घंटी हो सकती है. योग गुरु पंकज शर्मा कहते हैं कि खुद को या आपके किसी परिजन को इस तरह के लक्षण महसूस हों तो उसे गंभीरता से लें. "यदि हम योगाभ्यास को जीवन का अंग बना लें, तो हार्ट अटैक ( Heart attack ) से बचा जा सकता है। योगासन शरीर में प्राण की गति को बढ़ाता है। योग करने से दोबारा दिल के दौरे का खतरा 50 फीसदी तक कम हो जाता है। अपनी दिनचर्या में थोड़ा समय व्यायाम के लिए निकालें , प्रतिदिन कम से कम आधा घंटे व्यायाम करना हृदय के हृदय के लिए अच्छा माना गया है। आसनों और ध्यान से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप यूट्यूब पर योग गुरु पंकज शर्मा या चैनल का नाम sharnam सर्च कर सकते है पर आज आपको कुछ आसनों के बारे में जानकारी देंगे जो हृदय रोगों में काफी  फायदेमंद है इसके अलावा अगर आपके पास समय की बहुत ही कमी है तो कम से कम सुबह और शाम 15 - 15 तेज गति से टहले जिससे रक्त का संचार सुचारू रूप से होता रहे ।


1. वृक्षासन | Vrikshasana 

लाभ - वृक्षासन मन को शांत व् संतुलित करता है इससे ह्रदय की कार्य प्रणाली बेहतर होती है। शरीर को मजबूत लचीला बनता है और पूरे शरीर मे खून का संचार सुचारू करता है 


विधि - वृक्षासन को खली पेट करें और सुबह का समय वृक्षासन करने के लिए आदर्श है दोनों पैरो को मिला के खड़े हो और फिर दांए पैर को धीरे धीरे ऊपर उठाते हुए बायां पैर के घुटने के ऊपर जांग पर रख दे । साँस को अंदर की और लेते हुए  अब दोनो हाथो को ऊपर की तरफ ले जाते हुए प्राथना की मुद्रा में जोड़े ,सामने की ओर देखे इससे आपको संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी ,अपनी रीढ़ को सीधा रखें। ध्यान दें कि आपके शरीर को तना हुआ होना चाहिए और साँस सामान्य रूप से लेते रहे कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद साँस छोड़ते हुए पैर वापस नीचे ले आये और अब यही प्रक्रिया दूसरे पैर से करें ।


सावधानियां - उच्च और कम रक्त चाप के रोगी माइग्रेन और नींद की समस्या से पीड़ित या घुटने की समस्या हो, कूल्हे की चोट जैसे दिक्कतों में ये आसन न करें ।


2 .त्रिकोणासन । Trikonasana

त्रिकोणासन को करने से हृदय स्वस्थ होता है और छाती फैलती है जिससे साँस गहरी और लयबद्ध हो जाती है। इस आसन को करने से वजन भी कम होता है। मोटे लोगो के लिए यह आसन बेहद फायदेमंद है। चिंता, तनाव, कमर और पीठ का दर्द गायब हो जाता हैं।


विधि - इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों के बीच 2 से 3 फुट का फासला छोड़कर सीधे खड़े हो जाये। दायें पैर (right leg ) को दायी ओर मोड़कर रखे। अपने कंधो की उचाई तक दोनों हाथों को बगल में फैलाए। अब श्वास ले और दायी ओर ( right side ) झुके। झुकते समय नजर सामने रखे। दायें हाथ से दायें पैर की उंगलियों को छुए और बायाँ  हाथ (left hand ) सीधा आकाश की और रखे और नजर बायें हाथ की उंगलियों की और रखे। अब वापस सीधी अवस्था में लौटकर दूसरी और भी हाथ बदलकर यह अभ्यास करे। ऐसे कम से कम 5 से 10 बार करे। शरीर उठाते समय श्वास अन्दर ले औए झुकते समय श्वास छोड़े।


सावधानी - यह आसन करते समय सिरदर्द, चक्कर आना या पीठ दर्द जैसी समस्या हो या लो बी पी , हाई बी पी, माइग्रेन, जुलाब, गर्दन और पीठ की चोट लगने पर आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।



3 .अधोमुखोस्वानआसन | Adho Mukho Svanasana

लाभ - यह आसन इनसोम्निया ( Insomnia ) की तकलीफ में आराम देती है ब्लड सर्कुलेशन ( Blood circulation ) को ठीक करता है और शरीर को विश्राम देता है जिससे तंत्रिकाओं को शांति व् ऊर्जा मिलती है।


विधि - सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े हो जाएंं और उसके बाद दोनों हाथों को आगे करते हुए नीचे जमीन की ओर झुके ध्यान रखें झुकते समय आपके घुटने सीधे होने चाहिए और कूल्हों (hips) के ठीक नीचे होने चाहिए जबकि आपके दोनों हाथ कंधे के बराबर नहीं बल्कि इससे थोड़ा सा पहले झुका होना चाहिए।अपने हाथों की हथेलियों को झुकी हुई अवस्था में ही आगे की ओर फैलाएं और उंगलियां समानांतर रखें। श्वास छोड़ें और अपने घुटनों को अधोमुख श्वानासन मुद्रा के लिए हल्का सा धनुष के आकार में मो़ड़े और एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाएं। इस स्थिति पर अपने कूल्हों को पीछे की ओर खींचें। हाथों को पूरी तरह जमीन पर कंधों के नीचे से आगे की ओर फैलाए रखें, लेकिन उंगलियां जमीन पर फैली होनी चाहिए।

इसके बाद अपने घुटनों को जमीन पर थोड़ा और झुकाएं और कूल्हों को जितना संभव हो ऊपर उठाएं। सिर हल्का सा जमीन की ओर झुका होना चाहिए और आप पूरी तरह अधोमुख श्वानासन मुद्रा में हैं।


सावधानी - उच्च रक्तचाप ,आँखों की कोशिकाएं कमजोर होने ,कंधे पर चोट लगने पर या दस्त से पीड़ित हैं तो यह आसन न करेंI


4. सर्वांगासन । sarvangasana

लाभ - बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने के कारण ह्रदय सही तरीक़े से काम करता है साथ ही थकान और दुर्बलता को दूर करने में भी यह आसन बेहद लाभकारी है मानसिक तनाव भी काफी हद तक कम होता है



विधि - आसन पर सीधे लेटें, पांवों को तान कर श्वास भरते हुए धीरे-धीरे हाथों पर दबाव देते हुए पांवों को 90 अंश तक ले के आये कुछ क्षण रुककर श्वास बाहर निकालते हुए, कमर को उठाते हुए टांगों को भूमि से समानांतर करें। अब दोनों हाथों का सहारा पीठ को दें। हाथ जितने नीचे रहेंगे, पीठ उतनी ही सीधी होगी फिर धीरे से दोनों पांवों को आकाश की ओर उठा दें। ठोड़ी कंठकूप पर लगाये और कंधों से लेकर पांव की अंगुलियों तक शरीर एक सीध में रखें। कोहनियां अंदर की ओर होगी और पांवों को ढीला करें। पूर्ण सर्वांग में आने पर श्वास स्वाभाविक स्थिति में लें। इस आसन का धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाते हुए दस मिनट तक कर सकते हैं। वापिस आते हुए भी कोई झटका न लगे। पहले अपनी टांगों को भूमि के समानांतर करें। फिर पीठ को लगाते हुए 90 अंश तक लाएं और श्वास भरकर पांवों को धीरे-धीरे भूमि पर ले आएं। नीचे आते ही विश्राम करें और साँस सामान्य कर लें ।


सावधानी - गर्भावस्था ,उच्च रक्तचाप ,गंभीर ह्रदय रोग ,रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या या गर्दन में असहनीय दर्द जैसी समस्या हो तो ये आसन का अभ्यास नही करें ।


3 . भुजंगासन | Bhujangasana

लाभ - यह आसन दिल को स्वस्थ बनाता है और उसके स्वास को ज्यादा ग्रहण करने लायक करता है साथ मे छाती के फैलाव को बढ़ाता है और रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला करता है जिससे लोअर बैक पैन में काफी आराम मिलता है  और इसमें सालम्ब भुजंगासन की तुलना में अधिक शक्ति व् सामर्थ्य की जरुरत होती है।


विधि -जमीन पर मैट बिछाएं और उस पर पेट के बल लेट जाएं। अपने पैर सीधे और आपस में मिले हुए हो दोनों हाथ सीने के पास और कंधों के अगले बगल में रखे हो हथेलिया जमीन की तरफ अब गहरी सांस लेते हुए अपनी अपर बॉडी को ऊपर की तरफ उठाएं। आपकी कोहनी इस दौरान शरीर के साथ सीधी रेखा में होनी चाहिए। पैरों को इस तरह स्ट्रेच करें कि आपको अधिक खिंचाव महसूस ना हो। सिर को जितना हो सके ऊपर की तरफ रखे इस स्थिति में 15-30 सेकेंड के लिए रूकें। उसके बाद गहरी सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं और इस आसन को फिर से दोहराएं।


सावधानी - गर्भवती महिलाओं, हर्निया और अल्सर से पीड़ित लोगों को या पेट मे दर्द हो तो यह आसन नहीं करना चाहिए। यदि आपने हाल ही में पेट का ऑपरेशन करवाया है, तो कम से कम तीन महीने तक इस आसन के अभ्यास से बचें।


6. पादहस्तासन । Padahastasana

लाभ - इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है एक मजबूत इम्यून सिस्टम हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है इसके अलावा, यह याददाश्त में सुधार करता है और सिरदर्द में भी आराम पहुंचा सकता है


विधि - योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं ,अपने दोनों पैरों को आपस में मिलाकर रखें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं और फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को भी धीरे-धीरे नीचे लाते हुए पैरों के अंगूठे को छूने की कोशिश करें। ध्यान रहे कि इस दौरान आपके घुटने मुड़ने नहीं चाहिए। जब आपकी कमर में खिंचाव महसूस हो, तो धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

थोड़ी देर विश्राम करने के बाद फिर से इस प्रक्रिया को दोहराएं। पादहस्तासन को चार से पांच बार किया जा सकता है।


सावधानी - पेट दर्द और रीढ़ से जुड़ी कोई बीमारी है, तो इसको करने से पहले किसी चिकित्सक की जरूर सलाह लें। गर्भावस्था में महिलाओं को इस योगासन से बचना चाहिए।


15. दंडासन | Dandasana

लाभ - उपरोक्त सभी मुद्राओं के विपरीत इस मुद्रा में पीठ को मजबूती मिलती है व् कन्धों और छाती को फैलाव मिलता है मस्तिष्क की कोशिकाओं को शांत करने में मदद करता है।


विधि -जमीन पर दरी या चटाई बिछा कर बैठ और अपने पैरो को आगे की ओर सीधा रखे। दोनों पैरो को अलग अलग अपने कूल्हों के समांतर चौड़ाई पर रखे। स्वास प्रकिर्या नार्मल रखे। रीढ़ को बिलकुल सीधा रखे। अपने हाथो को अपने कूल्हों के पास अगल बगल में रखे। अपनी पूरी हथेलियों को जमीन पर टच करवाए और अपनी हथेलियों पर दबाव डालें और अपनी कमर को बिकुल सीधा करे। ध्यान रखे की कोहनियाँ मुड़नी नहीं चाहिए।

इस स्थिति में कम से कम 20 से 30 सेकंड रुके।

ऐसे बार बार दोहराये।


सावधानी - वैसे तो ये आसन सबसे सरल आसनों में से एक है और इसको हर कोई कर सकता है पर अगर आपकी पीठ के निचले हिस्से में और कलाई में दर्द है, तो आप इस आसन को ना करें


विशेष - हृदय रोग से पीड़ित रोगी कोई भी आसान और व्यायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले और किसी योग गुरु की देख रेख में योगाभ्यास करें ,हमेशा आसनों का अभ्यास खाली पेट करें ।

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