About us



himachalvoice.in एक युवा सोच के साथ बनाया गया सार्वजनिक मंच है। हमारे आस-पास, गाँवो, गली-मोहल्लों, छोटे-बड़े शहरों की बहुत सी खबरें और मुद्दे ऐसे होते है जिन्हें किसी कारणवश बड़ी-बड़ी अखबारों के छोटे-छोटे कोनों और टीवी चैंनलों की छोटी-छोटी सुर्खियों में स्थान नहीं मिल पाता। himachalvoice.in ऐसी ही छोटी-छोटी ख़बरों को दिखाने और मुद्दों को उठाने के लिए बनाया गया एक सार्वजनिक मंच है।  

हमारा सफर वर्ष 2019 के आखिरी महीने के दूसरे हफ्ते से शुरु हुआ। सफर की शुरुआत में हमने सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों के माध्यम से काम करना शुरू किया। हम आपको शुरुआत में ही बता चुके हैं कि himachalvoice.in युवा सोच यानि युवाओं द्वारा बनाया गया सार्वजनिक मंच है, सफर की शुरुआत में ही हमने हमारा डोमेन (himachalvoice.in) तो खरीद लिया था मगर आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण हम अपनी वेबसाइट नहीं बना पाए और सोशल मीडिया में ही मुद्दे उठाते रहे और खबरें दिखाते रहे। लोगों को हमारा काम काफी पसंद आया और हमें सबका भरपूर प्यार, स्नेह और सहयोग मिला।

सफर के आगे बढ़ते-बढ़ते काफ़ी कुछ बदल भी गया। हमारे ही हूबहू नामों और मिलते जुलते नामों से सोशल मीडिया में कई लोग आ गए और कुछ हूबहू वेबसाइट्स भी उभर के आई। (नोट : हम यहाँ पर किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों का नाम नहीं ले रहे हैं क्योंकि हमारी किसी से भी व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। हमें तो इस बात बहुत ज़्यादा खुशी है कि लोगों द्वारा हमारे काम को इतना पसंद किया गया और कुछ लोगों द्वारा हमारे जैसा ही काम शुरू भी किया गया)

इतने में हमें एक बात तो समझ आ गयी थी कि हम कुछ अच्छा काम कर रहे हैं तभी हमें इतने लोगों का प्यार मिल रहा है। खैर यहाँ तक का सफर जैसा भी था काफी सुहाना था। पर ये सुहाना सफर हमारे लिए ज़्यादा दिन का नहीं था, वर्ष 2020 का अप्रैल महीना आया जो कि हमारे लिए सबसे अधिक नागवार गुजरा। सोशल मीडिया का एक मंच फ़ेसबुक जहाँ से हमें लोगों का प्यार सबसे ज़्यादा मिलता था वहाँ पर हमारे अकाउंट्स में प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रतिबंध का कारण क्या था ये हमें आजतक नहीं पता लगा (ये हम मई महीने की 19 तारीख को लिख रहे हैं) खैर हमने संपर्क करने की बहुत कोशिश की मगर कोई सम्पर्क नहीं हो पाया और हमारे अकाउंट्स आज भी बंद हैं। ये हमारी ज़िंदगी का सबसे दुखभरा लम्हा था। दुःख का सबसे बड़ा कारण ये नहीं था कि हमारे अकाउंट्स बन्द थे, कारण ये था कि हमें चाहने वाले लोग हमें समझकर कहीं और जा रहे थे। जो हमसे देखा नहीं गया, क्योंकि वो लोग हमारे परिवार का एक हिस्सा थे, और जब अपना परिवार टूटता हुआ दिखता है तब दुःख होना स्वभाविक है।

हम सोशल मीडिया में नए अकाउंट भी बना सकते थे मगर कोई फायदा नहीं था, क्योंकि कई ऐसे अकाउंट कुछ समय पहले से ही चलना शुरू हो चुके थे। तो लोग हमपर विश्वास कैसे करते कि हम ही उनके वही पुराने वाले साथी है जिन्हें वो बेहद प्यार करते हैं। हमारे पास अंतिम रास्ता यही था कि हम अपनी वेबसाइट शुरू कर दें। आपसी सहयोग से हमने किसी तरह वेबसाइट का काम शुरू किया और अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह में हमारी यह वेबसाइट (himachalvoice.in) बनकर तैयार हो गई। अब आपके मन में यह सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि जब अप्रैल महीने में ही हमारी वेबसाइट बनकर तैयार हो चुकी थी तो हम अपने इस सफर की कहानी लगभग तीन सप्ताह बाद मई महीने में क्यों लिख रहे हैं। आपके इस सवाल का जवाब यह है कि हमें वेबसाइट के विषय में कोई ज्ञान नहीं था, हमने थोड़ा बहुत इधर-उधर से सीखा, थोड़ा इसके जानकारों से समझा और अभी भी सीखते-सीखते ही अपना यह सफर आगे बढ़ाना शुरू कर रहे हैं। उम्मीद है आपका सहयोग और प्यार हमें पहले के जैसा ही मिलेगा।

बस यही थी हमारी कहानी, हमें उम्मीद है की लॉकडाउन खत्म होने के बाद हमारे सोशल मीडिया के अकाउंट्स भी हमें वापस मिल जाएंगे। क्योंकि हमने अपनी सारी जानकारी फ़ेसबुक को भेज दी है जो शायद लॉकडाउन खत्म होने के बाद जब सारे काम सुचारू रूप से शुरू हो जाएंगे तभी रिव्यु (review) हो पाएगी। तो हम उसके बाद अपने पुराने मंचों में भी आपसे रुबरु होंगें। तब तक आप ऐसे ही अपना प्यार बरकरार रखे।

अपना और अपनी सेहत का ख्याल रखें, सुरक्षित रहें, क्योंकि हमें कोरोना को हराना है और देश को कोरोना मुक्त बनाना है। धन्यवाद।